सीएम नीतीश कुमार के नक़ाब हटाने की घटना पर भड़के उलेमा, बोले- देश की महिलाओं का किया अपमान, प्रधानमंत्री करें हस्तक्षेप

Ulema on Dhirendra Shastri

सहारनपुर : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा बुर्का का नकाब हटाने पर जहां सियासी गलियारों में बहस का मुद्दा बना हुआ है वहीं देवबंदी उलेमाओं ने भी नाराजगी जताई है। जमीयत दावातुल मुस्लिमीन के संरक्षक व मशहूर देवबंदी उलेमा मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़े घटनाक्रम पर गुस्सा ज़ाहिर किया है। उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान बुर्क़ा-नक़ाब पहनी महिला के चेहरे से नक़ाब हटाए जाने की घटना को “बेहद शर्मनाक और निंदनीय” क़रार दिया है। साथ ही मामले को लेकर पीएम मोदी से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ़ एक महिला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की महिलाओं की इज़्ज़त, निजता और सम्मान पर सीधा हमला है। उनका कहना था कि किसी भी महिला के पहनावे में ज़बरदस्ती दख़ल देना, वह भी सार्वजनिक मंच से, न इंसानियत के उसूलों के मुताबिक़ है और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप।

कारी इश्हाक गोरा ने कहा कि एक महिला का लिबास उसकी निजी पसंद और उसका संवैधानिक अधिकार है। नक़ाब, बुर्क़ा, साड़ी या कोई भी अन्य पहनावा—उस पर हाथ डालना और महिला की सहमति के बिना उसकी निजता को तोड़ना सरासर ग़लत है। मौलाना के मुताबिक़, जब ऐसा व्यवहार सत्ता में बैठे व्यक्ति की ओर से होता है, तो यह चिंता और भी गंभीर हो जाती है। मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने इसे महिला विरोधी मानसिकता का खुला प्रदर्शन बताते हुए कहा कि इस तरह की हरकतें समाज में ग़लत संदेश देती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एक मुख्यमंत्री सार्वजनिक मंच से किसी महिला की मर्यादा को ठेस पहुँचा सकता है, तो आम महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान का क्या होगा।

उन्होंने कहा कि इस्लाम महिला की इज़्ज़त, उसकी सहमति और उसकी गरिमा की सख़्त हिफ़ाज़त करता है। इसी तरह भारत का संविधान भी हर महिला को सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है। ऐसे में यह घटना न सिर्फ़ नैतिक रूप से ग़लत है, बल्कि संवैधानिक भावना के भी ख़िलाफ़ है। मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी हस्तक्षेप की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को इस घटना पर संज्ञान लेना चाहिए और ऐसे नेताओं को सख़्त नसीहत करनी चाहिए कि सत्ता में रहते हुए महिलाओं का सम्मान कैसे किया जाता है। उनका कहना था कि अगर देश का शीर्ष नेतृत्व इस तरह के मामलों पर स्पष्ट और मज़बूत संदेश नहीं देगा, तो समाज में गलत उदाहरण क़ायम होते रहेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि नीतीश कुमार को सिर्फ़ सफ़ाई देने के बजाय पूरे देश की महिलाओं से और विशेष रूप से संबंधित महिला से खुले तौर पर माफ़ी माँगनी चाहिए। मौलाना के अनुसार, यह माफ़ी किसी राजनीतिक मजबूरी के तहत नहीं, बल्कि नैतिक ज़िम्मेदारी और इंसानी संवेदना के एहसास के साथ होनी चाहिए। महिलाओं की इज़्ज़त पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। समाज, सत्ता और राजनीति—तीनों को यह बात समझनी होगी कि महिला सम्मान एक विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्य मूल्य है।

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